गुरुवार, 7 जनवरी 2010

'मेरे बेटे को मार डालाÓ

पलामू में बढ़ती उग्रवादी घटनाओं से परेशान पुलिस अब निर्दोष लोगों पर अपना गुस्सा उतारने लगी है। छतरपुर थाना के अंतर्गत पडऩे वाला गांव तेलाड़ी इन दिनों इसलिए सुर्खियों में है कि यहां के राजेंद्र यादव नामक युवक को पुलिस ने पूछताछ के बहाने पकड़ा और उसे मार डाला। उसके पिता दशरथ यादव बताते हैं कि 30 दिसंबर को सुबह पुलिस वाले घर पहुंचे और राजेंद्र यादव को अपने साथ लेते गए। पूछने पर पुलिस ने कहा, पूछताछ के बाद शाम को छोड़ दिया जाएगा। लेकिन उसे नहीं छोड़ा। दूसरे दिन गुरुवार की सुबह 10-11 बजे थाना पहुंचा तो प्रभारी नेेे कहा कि उसे डालटनगंज भेज रहे हैं। इसी बीच थाने में फोन आता है कि एक और व्यक्ति को पकड़ लिया गया, दोनों को साथ भेज दें। बताते-बताते दशरथ की आंखें भर आती हैं। अपने को काबू कर बताते हैं, अपराह्नï तीन बजे सदर थाना आया। यहां कुछ नहीं पता चला। फिर, एसपी आवास गया। वहां भी किसी ने मदद नहीं की। शाम हो गई हो तो वापस घर आ गया। एक जनवरी शुक्रवार को पुन: शहर थाना पहुंचा। यहां कुछ भी पता नहीं चला। लेकिन कई पुलिसकर्मियों ने मदद की। उसने बताया कि दो लोग छतरपुर से आए हैं। कौन हैं, नहीं पता। इसके बाद वह हाजत तक गए। जब अपने पुत्र को देखा तो वह बेहोश था। दूसरे कैदी रमेश यादव से पूछा तो उसने बताया कि इसे पुलिस वालों ने सौ लाठी मारा है। हमें भी बीस-पच्चीस लाठी मारी। रमेश ने भी कांपते-कांपते कहा, देखो तुम्हारे पिताजी आए हैं। किसी तरह उसकी आंख खुली। पिता ने कहा, कुछ खाने को ले आऊं। उसने अटकते-अटकते सेऽऽऽब कहा। इसके बाद पिता उसे सेब लाकर दिए। इतना बताते-बताते दशरथ यादव की आंखें भीग जाती हैं। सिसकते हुए कहते हैं, मैं भी घर चला आया। लेकिन एक जनवरी को साढ़े सात बजे के आस-पास खबर आई.....कि वह मर गया। पुलिस की इस कार्रवाई से पिता के भरोसे की लाठी तो टूट ही गई, राजेंद्र के दो अबोध बच्चे भी अपने बाप के साये से वंचित हो गए। सवाल उठता है कि क्या ऐसे निर्दोष लोगों की जान लेने से नक्सलवाद खत्म हो जाएगा?
संजय कृष्ण

आर्यों की जन्मभूमि

अंबिका प्रसाद वाजपेयी   आर्य लोग भारत के ही रहने वाले थे या कहीं बाहर से आए थे? इस विषय पर यूरोपियन अनुसंधान कर्ताओं ने बहुत कुछ लिखा है। ...