सोमवार, 23 अगस्त 2010

दर्द, दमन, दहशत के बीच सोसाकुटी

संजय कृष्ण :उ (नक्सली) दिने पिटेला इ (नक्सली) राइते पिटेला। यह दर्द अकेले लुडू देवी का नहीं है। उन जैसी सैकड़ों औरतें इसी दर्द, दमन और दहशत के बीच दिन और रात गुजारने को विवश हैं। लुडू देवी रांची जिले के इटकी प्रखंड के सोसाकुटी गांव की रहने वाली है। इस गांव का कसूर यह है कि इसी गांव का गुरुवा लोहार नक्सली है। अब पुलिस पूरे गांव के साथ नक्सलियों के साथ जैसा व्यवहार करती है। किसी का किवाड़ तोड़ देना, अनाज छींट देना, पके भात को चूल्हे में ही पलट देना..आदि-आदि। और, गांव में किसी लड़की ने सूट-सलवार पहन रखा हो तो, पुलिस की नजर में उसका नक्सली होना काफी है। ललिता कुमारी की उम्र 12-13 साल है। मां बचपन में ही गुजर गई। पिता हैं। सो, पढ़ाई बीच में ही छूट गई। पिछले आठ जुलाई, गुरुवार को जब सौ से ऊपर की संख्या में पुलिस बल पहुंचा तो गांव वालों के साथ उसने यही सलूक किया। ललिता ने स्कर्ट पहन रखा था। पुलिस ने सवाल दागा.क्या गुरुवा ने दिया तेरे को। जिस उम्र की दहलीज पर ललिता है, उसे क्या पता यह गुरुवा कौन है? गांव में दहशत का आलम यह है कि कोई गाड़ी यदि बिना हार्न बजाए घुस रही हो तो गांव के लोग भागकर छिपने लगते हैं। फ्रेंडली पुलिस का यह दहशत है। गांव की ही ऐतवारी, शशिकला की कहानी भी यही है। लुडू को बेटा विपुल लोहरा, जो नवयुवक छऊ नृत्य पार्टी में काम करता है, 19 जून को छऊ मुहानी से उठा ले गई। पिता सुखराम लोहरा कहते हैं कि मामला जब अखबार में आया तब जाकर उसे जेल भेजा गया। सोसाकुटी गांव का टोला है सोसोहातु। सड़क से सिंदरी गांव और उसके पीछे सोसोहातु। गांव तक जाने के लिए कोई सड़क नहीं। न बिजली न सिंचाई का कोई साधन। पूरी तरह बारिश पर निर्भर। इस गांव में उस बासंती से उसका दर्द पूछिए, जिसे पुलिस शादी की रात ही उसके पति सत्यनारायण मुंडा को उठा ले गई। शादी करने अपनी ब्याहता को ले आया था। घर का एकलौता चिराग। सो, पिता ने जश्न में कोई कोताही नहीं बरती। देर रात तक चला पार्टी..। क्या पता था कि कुछ घंटों में पार्टी का रंग फीका हो जाएगा..। पुलिस पहले भी उसे गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी थी। आरोप यही था कि वह दस्ते को लेवी की रकम वसूल कर और अन्य सामान पहुंचाता है। इधर, वह हालांकि वह खेती-बारी कर रहा था। लेकिन पुलिस..। उसके पिता धान सिंह मुंडा कहते हैं कि हम लोगों की स्थिति इधर कुआं, उधर खाई जैसी हो गई है। क्या करें, कहां जाए?