रविवार, 11 फ़रवरी 2018

राजभवन में उतरा बसंत


बागों में बहार है। कलियों में निखार है। पूरे वातावरण में चतुर्दिक मादकता बिखर रही है। धरती के कण-कण से हास और उल्लास फूट पड़ रहा है। मंद-मंद पवन में सुगंध की सुखद हिलोरे उठ रही हैं। मंजरियों का मुकुट पहने अमराइयों में मधुरिमा अंगड़ाइयां ले रही हैं। राजभवन का उद्यान दुल्हन की तरह सज गया है। पूरे परिसर में फूलों की चादर फैली हुई है। 

राजभवन रांची शहर के बीचोबीच स्थित है। यह कुल 62 एकड़ में फैला है, जिसमें 10 एकड़ में आंड्रे हाउस व राजभवन का सचिवालय है। इसका निर्माण 1930 में शुरू हुआ था यह मार्च, 1931 में तक यह पूर्ण हुआ था। उस समय इसकी लागत सात लाख रुपये आई थी। इसकी डिजाइन मिस्टर सैडो बैलर्ड ने की थी। इस भवन में ब्रिटिश डिजाइन की छाप है। इसके कुछ सुइट यहां के मौसम के हिसाब से बनाया गया है। बिल्डिंगों की छत रानीगंज टाइल्स से बनी है। कुछ में लकड़ी का इस्तेमाल किया गया है। राजभवन पूरा भवन हरा-भरा है। राजभवन में कई लॉन व गार्डेन हैं, जो महान व्यक्तियों के नाम पर रखे गए हैं। इसमें एक है अकबर गार्डेन, इसका निर्माण हाल में 2005 में किया गया है। यह कई प्रकार के गुलाब और मौसमी फूलों से महंकता है। बुद्धा गार्डेन नाम से एक ग्रीन हाउस है। यहां से खूबसूरत नजारा दिखता है। अशोका करीब 52 हजार फीट का खूबसूरत लॉन है। इसी प्रकार मूर्ति गार्डेन 15 हजार फीट, लीली पॉंड 12 हजार फीट का है। राजभवन में एक बड़ा हॉल है, जिसका नाम बिरसा मंडप रखा गया है। यहां पर सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित होती रहती हैं। राजभवन के दक्षिण में महात्मा गांधी गार्डेन है। यहां पर विभिन्न प्रकार के औषधीय पेड़-पौधे लगाए गए हैं। राजभवन के विशाल प्रांगण में बांसों का विशाल झूरमूट, 150 प्रकार के वृक्ष हैं। राजभवन के सामने ही एक नक्षत्र वन है, जिसका संचालन राजभवन द्वारा किया जाता है। यहां पर भी कई प्रजातीय के पौधे, वृक्ष आदि हैं।

राजभवन का उद्यान अब आम लोगों के लिए खुल गया है। यहां चहकते फूल हैं तो गाते हुए फव्वारे हैं। 52 एकड़ में फैले इस उद्यान में तरह-तरह के फूल, पौधे और औषधि हैं। नाचता हुआ मोर है और मसालों की खुशबू भी है। पिछले 35 सालों से राजभवन उद्यान की देखभाल कर रहे मुख्य उद्यान विक्षक चुलाही मंडल बताते हैं कि यहां 65 प्रकार के अलग-अलग फूल हैं। 1000 फलदार पौधे हैं। पांच सौ सखुआ के पेड़ है। दो सौ केला है। ये सब तो आम हैं। कुछ खास भी इस उद्यान में हैं।

कल्पतरू भी है और चंदन भी
विशाल उद्यान में दुर्लभ कल्पतरू के दो पेड़ भी हैं। चंदन के पेड़ भी हैं। लाल चंदन का पेड़ यहां देख सकते हैं। जिसे लोग रक्त चंदन भी कहते हैं। कल्पतरू के बारे में कई पौराणिक आख्यान है। सभी मनोकामना यहां पूरी होती है। इसलिए, इसका दर्शन जरूर करें।

सिंदूर का भी पेड़
उद्यान में सिंदूर के भी कई पेड़ है। सिंदूर के पेड़ में कांटे भी हैं। इसलिए, संभलकर देखें। सिंदूर के सूखे फल के अंदर गोल-गोल सरसों के आकार का दाना एक दूसरे से जुड़ा होता है। पंजे पर रगड़ते ही लाल हो जाता है।     
रुद्राक्ष भी यहां है
उद्यान में रुद्राक्ष के भी पेड़ हैं। इसके लिए उत्तराखंड जाने की जरूरत नहीं। यहां रुद्राक्ष के पेड़ देख सकते हैं। बड़े बेर की तरह फल लगता है और इसमें ही रुद्राक्ष निकलता है। यहां एक रुद्राक्ष अंडाकार है और एक गोलाकार। दोनों का अपना महत्व है। इसकी यहां माला बनाकर राजभवन में आने वाले विशेष अतिथियों को प्रदान किया जाता है।

किचन गार्डन भी
उद्यान में किचन गार्डन भी हैं। यहां लौंग, इलायची, दालचीनी, तेजपत्ता सहित कई अन्य मसालों का गंध भी ले सकते हैं। इनके अलावा टमाटर, गाजर, बैगन भी है। सभी आर्गेनिक। किसी के उत्पादन में किसी प्रकार का रासायनिक उर्वरता का प्रयोग नहीं किया जाता। गोबर से यहां खाद बनाया जाता है। यहां गोशाला भी है।  
गांधी औषधि गार्डेन
यहां हर्बल मेडिसिनल प्लांट भी हैं, जिसमें 35 प्रकार की जड़ी-बूटियां हैं। कई औषधीय पौधे और पेड़ यहां लगे हुए हैं। बबुई तुलसी, अश्वगंधा, लवंग, बिलायती धनिया, गंध प्रसारिणी, सर्पगंधा, मशकदाना आदि हैं।  

अकबर गार्डन
अकबर गार्डन में फूलों की बहार है। बसंत यहीं पर उतरा है। खिलते और हंसते हुए फूल और संगीत की धुन पर झूमते फव्वारे। यह सेल्फी जोन भी है। यहां हजारों प्रकार के फूल हैं। विदेशी भी देशी। यहां सर्वाधिक भीड़ रहती है। 

गुलाबों की प्रजातियां
उद्यान में दो सौ प्रकार के गुलाब यहां लगाए गए हैं। लाल, गुलाबी, सफेद से लेकर हर रंग। लोग यहां गुलाब के संग भी सेल्फी लेते हैं। गुलाब के कई आकार यहां हैं। पूरा परिसर गुलाबों की सुगंध से महकता रहता है।

असीम शांति बुद्धा गार्डन में
जब घूमते हुए थक जाएं तो बुद्ध की शरण में जा सकते हैं। यहां असीम शांति का अहसास होगा। ध्यानस्थ बुद्ध यहां हैं। खूबसूरत पार्क। बैठने के लिए जगह। ठीक बगल में यहां नाचते मोर का भी दर्शन कर सकते हैं। यहां और भी बहुत कुछ है।

पिछले तीन दशक से उद्यान की सेवा कर रहा हूू। आज यह सब दिखाई दे रहा है, वह तीन दशक मेहनत का नतीजा है। मेरे साथ पचास से ऊपर मजदूर दिन रात लगे रहते हैं। सितंबर में नए फूल-पौधे लगाने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। अक्टूबर के पहले सप्ताह में लगा दिया जाता है और फरवरी तक दीदार के लिए यह उद्यान तैयार हो जाता है।
अब्दुस्सलाम, उद्यान विक्षक, राजभवन


राजभवन में बहुत कीमती पेड़ भी लगाए गए हैं। यहां चाइनीज बांस है। कई विदेशी वृक्ष भी यहां लगाए गए हैं। यहां राइस प्लांट है, जो बासमती की तरह महकता है।
चुलाही मंडल मुख्य उद्यान विक्षक, राजभवन

रांची की नजर में गांधी

मैं रांची हूं। झारखंड की राजधानी। जब बिहार था, तब भी मुझे ग्रीष्मकालीन राजधानी का ओहदा मिला था। यहां की आबोहवा को देखकर ही अंग्रेजों ...